रक्तकृष्ण मूक्ष्मभेद के बारे में
रक्तकृष्ण मूक्ष्मभेद पुणे, भारत में स्थित वैदिक कठोरशैली संगीत और प्रायोगिक संगीत कलाकार, संगीतकार और अभिलेखन कलाकार हैं। रक्तकृष्ण मूक्ष्मभेद सनातन वैदिक हिंदू संस्कृति से काफी प्रभावित हैं और साथ ही दुनिया भर के अन्य कठोरशैली कलाकारों से भी। उन्होंने सेव योर सोल्स, पैरानॉयड, मृत्युंजय जैसे कई गाने और फ्री कल्चर, आई एम कमिंग, टू, सिक्स्थ सेंस और ऑन द वे टू होम जैसे निरूपण का अभिलेखन किया हैं।
रक्तकृष्ण (लाल-काले) रंग का उद्भव एक भव्य अर्थ और महत्व रखता है। यह एक भावुक कलात्मक दृष्टिकोण और सनातन वैदिक हिंदू संस्कृति की झलक को दर्शाता है। रंगों का अपना-अपना स्थान होता है, जो रचनाकार के आध्यात्मिक दृष्टिकोण और उनकी स्थिति पर निर्भर करता है। यहाँ, लाल-काले रंग जीवन की यात्रा को दर्शाते हैं, जहाँ लाल और काला रंग मिलकर एक चित्र प्रस्तुत करते हैं। बहता हुआ रक्त और काला रंग सूखे हुए रक्त को दर्शाते हैं, और लाल और काले रंग के बीच का संक्रमण जीवन की यात्रा को विभिन्न रंगों में प्रतिबिंबित करता है।
हिंदू संस्कृति में लाल रंग को शक्ति, सामर्थ्य, आत्मविश्वास और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जबकि काला रंग शालीनता, अधिकार, औपचारिकता का प्रतीक है और नकारात्मक ऊर्जा सहित सभी प्रकार की ऊर्जा को अवशोषित करता है। लाल और काला दोनों रंग कई देवी-देवताओं से जुड़े हुए हैं।
मालिक के बारे में
चैतन्य गौतम रक्तकृष्ण मूक्ष्मभेद श्रव्य रतान्ध्री, रक्तकृष्ण मूक्ष्मभेद ध्वनि निर्माणशाला के मालिक हैं, उनके पास रक्तकृष्ण मूक्ष्मभेद श्रव्य रतान्ध्री और इन व्यापारचिह्न से जुड़ी सभी संपत्तियों और लोगो का एकमात्र स्वामित्व है। चैतन्य गौतम ने संगीतकार मंडली में और साथ ही रक्तकृष्ण मूक्ष्मभेद ध्वनि निर्माणशाला में पूर्व उत्पादन से लेकर प्रकाशन तक गिटार और पूरी रचना में योगदान दिया है। उनकी वादन शैली में रॉक, हार्ड रॉक, हेवी मेटल, थ्रैश मेटल जैसे शुरुआती युग के भारी संगीत के विभिन्न रूप शामिल हैं। 2012 से लेकर अब तक संगीतकार मंडली सक्रिय है।
सहयोगी सदस्य

सुमीत आर्या

वी केदारेश्वर






